
इंद्रावती नदी के संरक्षण, जल-जंगल-जमीन की रक्षा तथा किसानों, ग्रामीणों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की लड़ाई को और अधिक संगठित एवं मजबूत बनाने के उद्देश्य से इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति, जिला बस्तर की नवीन जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया है। समिति के संभागीय सचिव सुभाष कश्यप द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में नवीन पदाधिकारियों की घोषणा की गई। जारी नियुक्ति आदेश के अनुसार जिला बस्तर कार्यकारिणी में पूरन सिंह कश्यप को अध्यक्ष तथा जगदू राम कश्यप को सचिव नियुक्त किया गया है। समिति ने जिले के विभिन्न विकासखंडों, तहसीलों और ग्रामीण क्षेत्रों से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों को शामिल करते हुए व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है, ताकि संगठन की गतिविधियों को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके। नवगठित कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर तोकापाल (घाट धनोरा) से गोवर्धन सेठिया, बस्तर (भोंड) से कृपालु कश्यप, लोहंडीगुड़ा (चित्रकोट) से घनश्याम मौर्य, बस्तर (आड़ावाल) से मनीराम बघेल, भानपुरी (देवड़ा) से यशवंत मौर्य, करपावंड (सवरा) से भुवनेश्वर कश्यप, जगदलपुर (पामेला) से अमीर कश्यप, बकावंड (मालगांव) से भोलाराम नाग, बस्तानार (पीरमेटा) से विमल पांडे तथा दरभा (डीलमिली) से मनीराम मांडवी , नानगुर (बड़े मुरमा) मंधर कश्यप को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी प्रकार तोकापाल (सिंघनपुर) से कमल कश्यप को सह सचिव नियुक्त किया गया है। अधिवक्ता सोनू कश्यप को विधिक सलाहकार का दायित्व सौंपा गया है। चित्रकोट (लोहंडीगुड़ा) से ललित चक्रधारी को मीडिया प्रभारी तथा तोकापाल (सिंघनपुर) से लुदरु राम मौर्य को सह मीडिया प्रभारी बनाया गया है। वहीं बस्तर (नारायणपाल) से कमलोचन ठाकुर को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। समिति के संभागीय अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति केवल नदी संरक्षण का आंदोलन नहीं, बल्कि बस्तर के जल, जंगल, जमीन, किसान, आदिवासी और ग्रामीण समाज के अधिकारों की सामूहिक आवाज है। उन्होंने कहा कि नई कार्यकारिणी क्षेत्र के जनहित के मुद्दों को मजबूती के साथ उठाते हुए जनआंदोलन को नई दिशा प्रदान करेगी। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी लगातार संकटों का सामना कर रही है। नदी, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए जनजागरण अभियान चलाया जाएगा तथा स्थानीय समुदायों को जोड़कर संरक्षण की दिशा में ठोस पहल की जाएगी। इसके साथ ही किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर भी संगठन सक्रिय भूमिका निभाएगा। समिति ने स्पष्ट किया कि किसानों को समय पर खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, कृषि लागत में कमी, ग्रामीण सड़क एवं बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसे विषयों पर निरंतर संघर्ष किया जाएगा। किसानों की समस्याओं को प्रशासन एवं शासन तक पहुंचाकर उनके समाधान के लिए व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। नवीन कार्यकारिणी के गठन के साथ ही समिति द्वारा व्यापक सदस्यता अभियान प्रारंभ करने की भी घोषणा की गई है। इसके तहत गांव-गांव जाकर युवाओं, किसानों, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा। समिति का लक्ष्य बस्तर के प्रत्येक गांव तक संगठन की पहुंच बनाना और जनभागीदारी के माध्यम से एक मजबूत जनआंदोलन खड़ा करना है। समिति के नेताओं ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और किसान हितों की रक्षा के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। बस्तर की अस्मिता, प्राकृतिक संसाधनों और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन पूरी मजबूती के साथ कार्य करेगा। सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संगठन के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा जनहित के मुद्दों पर निरंतर सक्रिय रहने का संकल्प व्यक्त किया।
जारीकर्ता:
सुभाष कश्यप
संभागीय सचिव
इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति
बस्तर संभाग
किशन चौहान की रिपोर्ट



